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Amit Kumar Yadav
← Poetry · कविता

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चाँद तारे तोड़कर

Verse

चाँद तारे तोड़कर भी अगर मैं तुम्हें दे ही दूँ उनके महबूब को दुखी करके क्या तुम खुश रहोगे ?

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